Contact: +91 844 894 1008
bgwebsite_logo
Bhagavad Gita
The Song of God

Bhagavad Gita: Chapter 11, Verse 46

किरीटिनं गदिनं चक्रहस्त-
मिच्छामि त्वां द्रष्टुमहं तथैव |
तेनैव रूपेण चतुर्भुजेन
सहस्रबाहो भव विश्वमूर्ते || 46||

किरीटिनम्-मुकुट धारण करना; गदिनम्-गदाधारी; चक्रहस्तम्-हाथ में चक्रधारण किए हुए; इच्छामि इच्छुक हूँ; त्वाम्-आपको; द्रष्टुम् देखना; अहम्–मैं; तथा एवं-उसी प्रकार से; तेन-एव-उसी; रुपेण-रूप में; चतुः जेन–चतुर्भुजाधारी; सहस्र-बाहो-हजार भुजाओं वाले; भव-हो जाइये; विश्वमूर्ते-विश्वरूप।

Translation

BG 11.46: हे सहस्र बाहु! यद्यपि आप समस्त सृष्टि में अभिव्यक्त हैं किन्तु मैं आपकी मुकुटधारी, चक्र और गदा उठाए हुए चतुर्भुज नारायण रूप के दर्शन करना चाहता हूँ।

Commentary

श्रीकृष्ण की विशेष कृपा से अर्जुन ने भगवान का विश्वरूप देखा है जिसका दर्शन कोई सरलता से नहीं कर सकता। अर्जुन को यह अनुभव होता है कि श्रीकृष्ण उसके केवल मित्र ही नहीं है अपितु उससे बढ़कर भी उनका अनुपम व्यक्तित्त्व हैं। उनका दिव्य स्वरूप अनगिनत ब्रह्माण्डों को अपने में समेटे हुए है फिर भी वह उनके अनन्त ऐश्वर्यों के प्रति आकर्षित नहीं होता। सर्वशक्तिमान भगवान की ऐश्वर्य भक्ति करने में उसकी कोई रुचि नहीं है अपितु इसके विपरीत वह सर्वशक्तिमान भगवान का पुरुषोतम रूप देखना चाहता है ताकि वह उनके साथ पहले जैसे मित्रवत् संबंध बनाए रख सके। भगवान श्रीकृष्ण को 'सहस्रबाहु' संबोधन से पुकारने का तात्पर्य 'हजारों भुजाओं वाले' से है। अर्जुन अब भगवान श्रीकृष्ण से अपना 'चतुर्भुज रूप' अर्थात् चार भुजाओं वाला रूप दिखाने की प्रार्थना कर रहा है। एक अन्य अवसर पर श्रीकृष्ण अपने इस चतुर्भुज नारायण रूप में अर्जुन के सम्मुख प्रकट हुए थे। द्रौपदी के पांच पुत्रों के हत्यारे अश्वत्थामा को जब अर्जुन बांधकर उसे द्रौपदी के पास ले आया तब उस समय श्रीकृष्ण अपने चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए थे

निशम्य भीमगदितं द्रौपद्याश्च चतुर्भुजः। 

आलोक्य वदनं सख्युरिदमाह हसन्निव।।

(श्रीमद्भागवतम्-1.7.52) 

"चतुर्भुजधारी श्रीकृष्ण ने जब भीम, द्रौपदी और अन्य के कथनों को सुना तब वह अपने प्रिय मित्र अर्जुन की ओर देखकर मुस्कराने लगे।" भगवान से चतुर्भुज रूप में प्रकट होने की प्रार्थना कर अर्जुन यह भी पुष्टि कर रहा है कि भगवान का चतुर्भुज रूप उनके दो भुजा वाले रूप से भिन्न नहीं है।

Bookmark this Verse

Sign in to save your favorite verses.

Add a Note
Swami Mukundananda
11. विश्वरूप दर्शन योग

Quick Jump to Any Verse

Navigate directly to the wisdom you seek

Book with feather

Stay Connected!

Verse of the Day

Start your day with the timeless inspiring wisdom from the Holy Bhagavad Gita delivered straight to your email!

Thanks for subscribing to "Bhagavad Gita - Verse of the Day"!