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Bhagavad Gita
The Song of God

Bhagavad Gita: Chapter 2, Verse 69

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी |
यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने: || 69||

या-जिसे; निशा-रात्रि; सर्व-सब; भूतानाम्-सभी जीवः तस्याम्-उसमें; जागर्ति-जागता रहता है; संयमी-आत्मसंयमी; यस्याम्-जिसमें; जाग्रति-जागते हैं; भूतानि–सभी जीव; सा-वह; निशा–रात्रि; पश्यतः-देखना; मुनेः-मुनि।

Translation

BG 2.69: जिसे सब लोग दिन समझते हैं वह आत्मसंयमी के लिए अज्ञानता की रात्रि है तथा जो सब जीवों के लिए रात्रि है, वह आत्मविश्लेषी मुनियों के लिए दिन है।

Commentary

 श्रीकृष्ण ने यहाँ दिन और रात का प्रतीकात्मक रूप में प्रयोग किया है। लोग प्रायः इसका प्रयोग शब्दिक अर्थ के रूप में करते हैं। एक समय की बात है कि 'खड़े श्री बाबा' सदा एक टांग पर खड़े रहने वाले तपस्वी थे। उनके शिष्य उन्हें सिद्ध पुरुष मानते थे। वह पैंतीस वर्ष तक सोये नहीं। वह अपने कक्ष में लटकती हुई रस्सी पर अपनी भुजाओं को रखकर विश्राम करते थे। वह स्थिरता से लगातार खड़े रहने के लिए रस्सी का प्रयोग करते थे। 

यह पूछे जाने पर कि इस प्रकार की कठोर तपस्या का क्या प्रयोजन है वह भगवद्गीता के इसी श्लोक को उद्धृत करते थे, "जिसे सभी जीव रात्रि समझते हैं वह आत्मसंयमी के लिए दिन है।" इसी का अभ्यास करते हुए उन्होंने रात को सोना छोड़ दिया। अब यह देखिए कि सांसारिक लोगों द्वारा इस महान त्याग का किस प्रकार से अनर्थ किया गया। निरंतर खड़े रहने से उनके पैरों और टांगों में सूजन आ गयी होगी और इसलिए वह शारीरिक रूप से खड़े रहने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते थे। आइए, अब श्रीकृष्ण के शब्दों का सटीक अर्थ समझने का प्रयास करें। वे जिनकी चेतना लौकिक है, वे सांसारिक सुखों को ही जीवन का मुख्य लक्ष्य मानते हैं। वह लौकिक सुखों के अवसर को जीवन की सफलता अर्थात् दिन और लौकिक तथा इन्द्रिय सुख से वंचित होने को अंधकार अर्थात् रात समझते हैं।

दूसरी ओर जो दिव्य ज्ञान से युक्त होकर बुद्धिमान हो जाते हैं, वे मनुष्य इन्द्रियों के विषय भोगों को आत्मा के लिए हानिकारक मानते हैं। इसलिए वे इसे 'रात्रि' के रूप में देखते हैं। वे आत्मा के उत्थान के लिए इन्द्रियों के विषय भोगों से विरक्त रहते हैं और इसलिए वे रात्रि को 'दिन' के रूप मे देखते हैं। इन शब्दों का सांकेतिक रूप में प्रयोग कर श्रीकृष्ण यह व्यक्त करते हैं कि जो एक सिद्ध महापुरुष के लिए रात्रि है उसे सांसारिक लोग दिन मानते हैं और इसी प्रकार से जिसे सिद्ध महापुरुष दिन समझते हैं, वह उनके लिए रात्रि है।

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